उपनयन संस्कार, जिसे जनेऊ संस्कार या यज्ञोपवीत संस्कार भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है। यह संस्कार बालक के जीवन में शिक्षा, अनुशासन, ब्रह्मचर्य और आध्यात्मिक चेतना के शुभ आरंभ का प्रतीक माना जाता है। इस संस्कार के माध्यम से बालक को गुरु के सान्निध्य में वेदाध्ययन एवं सदाचार के मार्ग पर अग्रसर किया जाता है।

उपनयन संस्कार में बालक को पवित्र जनेऊ धारण कराया जाता है और गायत्री मंत्र का उपदेश दिया जाता है। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं देव पूजन के साथ सम्पन्न यह संस्कार बालक के व्यक्तित्व, बुद्धि और चरित्र के निर्माण में सहायक होता है। श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया उपनयन संस्कार जीवन में संयम, ज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति प्रदान करता है।

🕉️ पूजा विधि

• गणेश पूजन एवं संकल्प
• कलश स्थापना
• नवग्रह एवं देवता पूजन
• उपनयन हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
• जनेऊ धारण एवं गायत्री मंत्र उपदेश
• आरती एवं आशीर्वाद

⏰ समय

⏱️ लगभग 3 से 4 घंटे

🔑 उपनयन (जनेऊ) संस्कार के लाभ

  • विद्या एवं ज्ञान का शुभ आरंभ
  • अनुशासन, संयम और सदाचार का विकास
  • आध्यात्मिक चेतना एवं संस्कारों की प्राप्ति
  • बुद्धि, स्मरण शक्ति और चरित्र निर्माण
  • जीवन में सकारात्मक दिशा एवं मार्गदर्शन