नामकरण संस्कार हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है, जिसमें शिशु को विधिवत नाम प्रदान किया जाता है। यह संस्कार सामान्यतः जन्म के ग्यारहवें, इक्कीसवें दिन या शुभ मुहूर्त में सम्पन्न किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिशु का नाम उसके व्यक्तित्व, भाग्य और जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है, इसलिए नामकरण संस्कार वैदिक विधि से करना अत्यंत शुभ माना गया है।

नामकरण संस्कार में पंचांग, नक्षत्र एवं जन्म विवरण के अनुसार शिशु के लिए मंगलकारी नाम का चयन किया जाता है। वैदिक मंत्रोच्चार, देव पूजन एवं आशीर्वाद के साथ शिशु के कान में उसका नाम उच्चारित किया जाता है। श्रद्धा एवं परंपरा के अनुसार किया गया नामकरण संस्कार शिशु के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

🕉️ पूजा विधि

• गणेश पूजन एवं संकल्प
• कलश स्थापना
• नवग्रह एवं देवता पूजन
• वैदिक मंत्रोच्चार
• शिशु के कान में नाम उच्चारण
• आरती एवं आशीर्वाद

⏰ समय

⏱️ लगभग 1 से 1.5 घंटे

🔑 नामकरण संस्कार के लाभ

  • शिशु के जीवन में शुभता एवं सौभाग्य
  • व्यक्तित्व एवं भाग्य का सकारात्मक विकास
  • नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा
  • बुद्धि, स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्राप्ति
  • पारिवारिक सुख-शांति एवं मंगल